
जब न्यूयॉर्क की सबसे ऊंची 110 मंज़िला बिल्डिंग ट्विन टावर से टकराए विमान
11 सितंबर अमेरिका के इतिहास में काले अक्षरों में दर्ज है. यह विश्व की एक कभी नहीं भूलने वाली दर्दनाक घटना है, जिसे अतंकियों ने अंजाम दिया था. आतंकवादियों का एक विमान सुबह 8.45 बजे नॉर्थ टावर से टकराया. 102 मिनट तक इसमें आग धधकती रही और फिर 10.28 मिनट पर महज़ 11 सेकेंड में यह टावर ढह गया.
पहले टावर से विमान टकराने के 18 मिनट बाद सुबह 09.03 बजे दूसरे ट्विन टावर से एक और विमान आकर टकराया. 56 मिनट तक यह टावर भी आग और धुंए से जूझता रहा, फिर अगले 9 सेकेंड में भरभरा कर गिर गया.
नॉर्थ टावर की 47वीं मंज़िल पर काम करने वाले ब्रूनो डेलिंगर उस घटना को याद करते हुए कहते हैं, "इमारत गिरने की आवाज़ के बाद, कुछ ही सेकेंड में वहां घुप्प अंधेरा छा गया. रात से भी घना अंधेरा, कुछ पल के लिए सभी आवाज़ें भी गायब हो गईं. मैं सांस तक नहीं ले पा रहा था."
"मुझे लगा कि मैं मर चुका हूं क्योंकि दिमाग़ किसी ऐसी चीज़ को प्रोसेस नहीं कर पा रहा था." यह बात उन्होंने 11 सितंबर के स्मारक और संग्रहालय से अपनी आपबीती में कहा।
इतिहास में 11 सितंबर का दिन एक दुखद घटना के साथ दर्ज है। दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका के सीने पर इस दिन हुए घातक आतंकी हमले ने एक ऐसा जख्म दिया, जिसकी टीस रहती दुनिया तक कायम रहेगी। 2001 को 11 सितंबर के दिन आतंकवादियों ने यात्री विमानों को मिसाइल की तरह इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के विश्वप्रसिद्ध वर्ल्ड ट्रेड टॉवर और पेंटागन को निशाना बनाया।
इसे दुनिया 9/11 से जानती है। यह दुनिया का सबसे बड़े आतंकी हमलों में से एक है. 11 सितंबर 2001 की सुबह वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में लोग रोजाना की तरह काम कर रहे थे. तक़रीबन सुबह का समय 8:46 हो रहा था. तभी न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के उत्तरी टॉवर से एक जेट एयरलाइन्स का विमान टकराया. देखते देखते चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई.
इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, तभी 9:03 पर एक और जेट विमान दक्षिणी टावर से टकराया. विमानों के टकराने से टावर में भयानक आग लग गई. यह अमेरिका में होने वाला सबसे बड़ा आतंकी हमला था.अमेरिका की शान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पलभर में राख़ का गुबार बन गया. इस आतंकी हमले में लगभग 3000 लोगों ने अपनी जान गंवाई.
आतंकियों द्वारा इस हमले को अंजाम तक पहुंचाने के लिए 4 जेट एयरलाइन्स विमान हाईजेक किए गए थे. इसमें से 2 विमान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर और एक पेंटागन पर गिराया गया गया, हालांकि चौथा विमान शेंकविले के खेत में जा कर गिर गया.
इस पूरे हमले का जिम्मा अलकायदा ने लिया, उस समय ओसामा बिन लादेन अलकायदा का मुखिया था. हमले के अगले ही दिन अमेरिका ने अलकायदा से जंग का ऐलान कर दिया. वह अपने ऊपर हुए हमले का बदला लेना चाहता था. पर उसे कामयाबी नहीं मिल रही थी.
इस हमले के कई साल बाद अमेरिकी इंटेलीजेंस ब्यूरो ने पाकिस्तान के ऐबटाबाद में ओसामा को ढूंढ निकाला. तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने तत्काल प्रभाव से 29 अप्रैल को ओसामा बिन लादेन के ठिकाने पर हमले का ऑर्डर जारी कर दिया.
सत्याग्रह आंदोलन का बिगुल बजा
जैसा कि आप जानते हैं कि महात्मा गांधी का आज़ादी में बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने लोगों के हक़ के लिए कई आंदोलन चलाए. लेकिन सबसे ज्यादा लोकप्रियता उन्हें सत्याग्रह आंदोलन से मिली. उन्होंने पहली बार दक्षिण अफ्रीकी सरकार के ख़िलाफ सत्याग्रह आंदोलन किया था.
दक्षिण अफ़्रीकी सरकार द्वारा एक पूंजीवादी अध्यादेश लाया गया था. जिसका विरोध अफ्रीका में रहने वाले भारतीय कर रहे थे. और उस आंदोलन का नेतृत्व महात्मा गांधी ने किया.
11 सितंबर 1906 को अहिंसात्मक तरीके से गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन की शुरूआत की. इस आंदोलन में गांधी द्वारा पूंजीवाद, अन्याय और रंगभेद की नीति के विरुद्ध आवाज़ उठाई गई. जिसके कारण उन्हें जेल भी जाना पड़ा.
अफ्रीका में आंदोलन ख़त्म कर वे 15 जनवरी को भारत लौट आए. गांधी के सत्याग्रह का असर भारत पर भी दिख रहा था. सत्याग्रह की चिंगारी बिहार तक पहुंच चुकी थी. राज कुमार शुक्ल ने गांधी जी को बिहार आने के लिए निमंत्रण भेजा.
इसे गांधी जी ने स्वीकार कर लिया. 10 अप्रैल 1917 को गांधी जी बिहार के चंपारण पहुंचे. वहां उन्होंने अंग्रेजी सरकार के ख़िलाफ सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत की. यह आंदोलन चंपारण आंदोलन के नाम से भी जाना जाता है.
चंपारण सत्याग्रह आंदोलन अंग्रेजी सरकार को नागवार गुजरा. उन्होंने गांधी समेत कई आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया. हालाँकि गांधी के प्रति व्यापक जन समर्थन हासिल था, इसलिए अदालत में सुनवाई के दौरान मजिस्ट्रेट ने उन्हें बिना जमानत छोड़ने का आदेश दे दिया.
यह आंदोलन गांधी जी के सबसे सफल आंदोलनों में से एक रहा.चंपारण सत्याग्रह आंदोलन के बाद गांधी जी ने 1918 में गुजरात के खेड़ा में एक और बड़ा सत्याग्रह किया. यह अंग्रेजों द्वारा किसानों से ज्यादा कर वसूली के विरोध में किया गया. इस आंदोलन में सरदार पटेल भी गांधी जी के साथ थे.
स्वामी विवेकानंद का शिकागो में भाषण
स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो में 11 सितंबर 1893 को आयोजित विश्व धर्म संसद में भाषण दिया था. उन्होंने अपने भाषण की शुरुआत मेरे प्यारे अमेरिकी भाइयों और बहनों से किया था. आज उनके भाषण को लगभग 125 साल पूरे हो रहे हैं, लेकिन उनकी प्रतिध्वनि आज भी सुनाई देती है.
भाषण में दिया गया संदेश आज भी अपने अस्तित्व में बना हुआ है. उन्होंने शिकागो में कहा था कि "मुझे गर्व है. अपने धर्म पे, जिसने दुनिया के हर सताए हुए लोगों को अपने देश में शरण दी."
सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि उन्होंने सभी धर्मों के उद्देश्य को एक सूत्र में रखा. जिस प्रकार पानी की धारा अलग-अलग दिशाओं से बह कर एक नदी का निर्माण करती है. ठीक उसी प्रकार से अलग-अलग धर्मो का एक हीं उद्देश्य होता है.
स्वामी विवेकानंद का यह भाषण मौजूदा समय में भी प्रासंगिक लगता है. शिकागो के भाषण में उन्होंने गीता के श्लोकों का वर्णन करते हुए कहा था कि ''जो भी मुझ तक आता है, चाहे कैसा भी हो, मैं उस तक पहुंचता हूं. लोग अलग-अलग रास्ते चुनते हैं, परेशानियां झेलते हैं, लेकिन आखिर में मुझ तक पहुंचते हैं."
स्वामी विवेकानंद का यह वक्तव्य बहुत ही अहमियत रखता है और भारत की मजबूत छवि को प्रस्तुत करता है.
चिली में सैनिक विद्रोह और तख्तापलट
सल्वाडोर अलांदे दुनिया के पहले ऐसे व्यक्ति थे, जिन्हें लोकतांत्रिक रूप से मार्क्सवादी देश चिली का राष्ट्राध्यक्ष चुना गया था. वह 1970 में सत्ता में आए थे. उन्होंने अपनी नीतियों से कई सुधार किए थे. वह चिली में कई बदलाव लाना चाहते थे, लेकिन उनकी नीतियां विफल हो रही थीं.
महंगाई बढ़ती जा रही थी और खाद्य पदार्थों की कीमतों में इज़ाफा हो रहा था. यही नहीं चिली में लगातार हुई हड़तालों से अर्थव्यवस्था भी चरमरा रही थी.
सल्वाडोर अलांदे उस समय अपने समर्थकों से अपील कर रहे थे कि उनका साथ दें. पर तब तक मामला बहुत ज्यादा बिगड़ चुका था. उस समय की दो विपक्षी पार्टी सल्वाडोर अलांदे के इस्तीफे पर अड़ी थीं. हालांकि उनकी ये अपील नामंजूर कर दी गई. ऐसा भी बताया जाता है कि राष्ट्रपति अलांदे के विरोधी उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने सैन्य विद्रोह का रास्ता चुना.
परिणामस्वरूप, 11 सितंबर 1993 को चिली के राष्ट्रपति सल्वाडोर अलांदे सरकार का तख्तापलट कर उनकी हत्या कर दी गई. उस समय विद्रोही सैनिकों ने वहां संसद पर 17 बम गिराए थे. इस पूरे घटनाक्रम में कई निर्दोषों की जान चली गई. सल्वाडोर अलांदे की मृत्यु के बाद जनरल पिनोचे ने सत्ता संभाली. अपने शासनकाल में उन्होंने हजारों राजनीतिक विरोधियों का कत्लेआम कराया.
देश दुनिया में 11 सितंबर की तारीख पर दर्ज अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं का सिलसिलेवार ब्यौरा इस प्रकार है:-
1893 : अमेरिका के शिकागो क्षेत्र में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता और हिंसा पर ऐतिहासिक भाषण दिया। इस दौरान उन्होंने सभी धर्मों की अच्छाइयों का भी जिक्र किया।
1895 : महान स्वतंत्रता सेनानी, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रसिद्ध गांधीवादी नेता विनोबा भावे का जन्म।
1906 : महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ़्रीका में सत्याग्रह आन्दोलन आरंभ किया।
1919 : अमेरिकी नौसेना ने होंडुरास पर आक्रमण किया।
1922 : आस्ट्रेलिया के मेलबर्न में सचित्र दैनिक समाचार पत्र द सन न्यूज पेक्टोरियल की शुरूआत।
1939 : इराक और सऊदी अरब ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
1948 : ब्रिटिशकालीन भारत के प्रमुख नेता और 'मुस्लिम लीग' के अध्यक्ष मुहम्मद अली जिन्ना का निधन।
1951 : फ्लोरेंस चैडविक ने इंग्लिश चैनल तैरकर पार किया। उन्हें इंग्लैंड से फ्रांस पहुंचने में 16 घंटे और 19 मिनट लगे। ऐसा करने वाली वह पहली महिला।
1961 : विश्व वन्यजीव कोष की स्थापना।
1968 : एयर फ्रांस का विमान नाइस के निकट दुर्घटनाग्रस्त। हादसे में 89 यात्रियों और चालक दल के छह सदस्यों की मौत।
2001: अमेरिका में आतंकवादियों ने विमान अपहरण कर न्यूयार्क के वर्ल्ड ट्रेड टावर की दो इमारतों, वर्जीनिया स्थित पेंटागन और पेन्सिलवेनिया पर हमला किया।
2003 : चीन के विरोध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति जार्ज बुश तिब्बत के धार्मिक नेता दलाई लामा से मिले।
2005 : गाजा पट्टी में 38 साल से जारी सैन्य शासन समाप्त करने की घोषणा।
2019 : अमेरिका ने प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के सरगना नूर वली महसूद पर प्रतिबंध लगाया और उसे वैश्विक आतंकवादी करार दिया।
2020 : सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश का निधन।