
सिनेमा से सामाजिक कार्य तक
Nana Patekar के निधन के बारे में 8 अक्टूबर 2026, की सबसे बड़ी दु:खद खबरों में है। वे 75 वर्ष के थे। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, गोवा स्थित उनके आवास पर वे बेहोश मिले और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने लगभग 45 मिनट तक CPR दिया, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका। मृत्यु का प्रारंभिक कारण cardiac arrest बताया गया है। अधिकारियों ने medico-legal case दर्ज किया है और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया की जा रही है।
अंतिम सार्वजनिक उपस्थिति: नाना पाटेकर ने 4 अक्टूबर 2026 को गोवा के डोना पाउला में Samraat Club International के कार्यक्रम में हिस्सा लिया था।
नाना पाटेकर कौन थे?
पूरा नाम: विश्वनाथ पाटेकर
जन्म: 1 जनवरी 1951, महाराष्ट्र
क्षेत्र: हिंदी व मराठी सिनेमा, रंगमंच और निर्देशन
फिल्मी शुरुआत: Gaman (1978)
निर्देशन: Prahaar: The Final Attack (1991)
सम्मान: तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री (2013) सहित कई पुरस्कार।
प्रमुख फिल्में
परिंदा, क्रांतिवीर, प्रहार, अग्निसाक्षी, खामोशी: द म्यूजिकल, यशवंत, अब तक छप्पन, अपहरण, राजनीति, वेलकम और नटसम्राट उनकी चर्चित फिल्मों में शामिल हैं। गंभीर भूमिकाओं के साथ वेलकम में उदय शेट्टी का उनका हास्य किरदार भी बेहद लोकप्रिय हुआ।
सामाजिक कार्य
अभिनय के अलावा वे ग्रामीण और किसान मुद्दों से जुड़े सामाजिक कार्यों के लिए भी जाने जाते थे। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ NAAM Foundation के माध्यम से महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों और ग्रामीण परिवारों की मदद, जल संरक्षण तथा किसानों के बच्चों की शिक्षा जैसे कामों में योगदान दिया।
राजनीतिक जगत से भी श्रद्धांजलियां सामने आई हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और अन्य नेताओं ने उनके निधन पर शोक व्यक्त किया।
नाना पाटेकर: अभिनय की अलग पहचान
नाना पाटेकर यानी विश्वनाथ पाटेकर ने हिंदी और मराठी सिनेमा में अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद-अदायगी और विविधतापूर्ण भूमिकाओं से अलग पहचान बनाई। 1978 की फिल्म *गमन* से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई और आगे चलकर उन्होंने गंभीर, नकारात्मक, सामाजिक तथा हास्य भूमिकाओं में अपनी प्रतिभा साबित की।
1989 की *परिंदा* उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रही। इस फिल्म में उनके अभिनय के लिए उन्हें **राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता** का सम्मान मिला। इसके बाद *क्रांतिवीर* (1994) में उनके प्रभावशाली अभिनय ने उन्हें **सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार** दिलाया। *अग्निसाक्षी* (1996) के लिए उन्हें एक बार फिर **सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार** मिला। इस तरह अभिनय के लिए उनके नाम तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार दर्ज हुए।
नाना पाटेकर की खासियत यह रही कि उन्होंने एक ही तरह के किरदारों तक खुद को सीमित नहीं रखा। *अंगार* में नकारात्मक भूमिका, *अब तक छप्पन* में पुलिस अधिकारी, *राजनीति* में राजनीतिक व्यक्तित्व और *वेलकम* में उदय शेट्टी जैसे हास्य किरदारों ने उनकी बहुमुखी प्रतिभा को सामने रखा। *नटसम्राट* में उनके अभिनय को भी विशेष सराहना मिली।
सिनेमा के साथ उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया और *प्रहार: द फाइनल अटैक* (1991) का निर्देशन किया। कला और सिनेमा में उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें **2013 में पद्मश्री** से सम्मानित किया।
नाना पाटेकर की फिल्मी विरासत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू उनकी अभिनय शैली है—संवादों की तीव्रता, चेहरे के भाव और किरदार में पूरी तरह उतर जाने की क्षमता ने उन्हें भारतीय सिनेमा के विशिष्ट अभिनेताओं में स्थान दिलाया। उनकी फिल्मों ने यह दिखाया कि लोकप्रिय सिनेमा और गंभीर अभिनय, दोनों में एक कलाकार अपनी अलग पहचान कायम कर सकता है।
1978 — गमन से फिल्मी करियर की शुरुआत।
1988 — सलाम बॉम्बे! से व्यापक पहचान मिली।
1989–90 — परिंदा के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
1991 — प्रहार: द फाइनल अटैक से निर्देशन में कदम रखा।
1994–95 — क्रांतिवीर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और फिल्मफेयर पुरस्कार मिला।
1996–97 — अग्निसाक्षी के लिए दूसरा सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
2000 के दशक — अब तक छप्पन, अपहरण जैसी फिल्मों में चर्चित भूमिकाएं निभाईं और नकारात्मक भूमिकाओं के लिए भी सम्मान प्राप्त किए।
2007 — वेलकम में उदय शेट्टी की हास्य भूमिका से उनकी बहुमुखी प्रतिभा का एक नया पक्ष सामने आया।
2010 — राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2013 — कला और सिनेमा में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित हुए।
2016 — मराठी फिल्म नटसम्राट में अभिनय के लिए व्यापक प्रशंसा मिली।
समग्र उपलब्धि: नाना पाटेकर के खाते में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और दो फिल्मफेयर मराठी पुरस्कार दर्ज हैं।