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मानव जीवन के लिए भक्ति सबसे सरल और सुरक्षित मार्ग है। अर्जुन के प्रश्न के उत्तर में श्रीकृष्ण बताते हैं कि निर्गुण, अव्यक्त ब्रह्म की उपासना संभव तो है, परंतु देहधारी भक्त के लिए वह कठिन मार्ग है। इसलिए सगुण भक्ति में प्रेमपूर्वक उपासना करना अधिक सहज है। श्रीकृष्ण भक्ति की क्रमिक सीढ़ियाँ बताते हुए कहते हैं कि पहले मन और बुद्धि को भगवान में स्थिर करो; यदि यह संभव न हो तो अभ्यास करो। यदि यह भी कठिन लगे, तो अपने सभी कर्म ईश्वर को अर्पित करो। और यदि इतना भी न हो सके, तो कर्मफल की आसक्ति का त्याग कर दो, क्योंकि फल-त्याग से शांति प्राप्त होती है। यहाँ श्रीकृष्ण ‘प्रिय भक्त’ के गुणों का वर्णन करते हैं—जो द्वेष-रहित, करुणामय, अहंकार और ममता से मुक्त, सुख-दुःख तथा मान-अपमान में सम, क्षमाशील, संतुष्ट, संयमी और जिसकी मन-बुद्धि ईश्वर में अर्पित हो, वही उन्हें अत्यंत प्रिय है। पूजन किसका करें? इसे पढ़कर प्रत्येक मानव समझ सकता है कि ईश्वर को कैसे प्राप्त किया जा सकता है। For human life, devotion is the simplest and safest path. In response to Arjuna’s question, Shri Krishna explains that worship of the formless, unmanifest Brahman is indeed possible, but for ...