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होल्गर कर्स्टन की लेखन शैली शोधपूर्ण होते हुए भी सरल, कथात्मक और रोचक है। उनकी अनोखी दृष्टि ने उन्हें आधुनिक धार्मिक-इतिहास लेखन की सबसे चर्चित आवाज़ों में स्थान दिया। ईसा मसीह भारत में धार्मिक इतिहास को एक नए प्रकाश में देखने की प्रेरक कोशिश है। इस पुस्तक में होल्गर कर्स्टन उन “खोए हुए वर्षों” की खोज करते हैं, जिनमें यीशु का जीवन बाइबिल में वर्णित नहीं है। लेखक तर्क देते हैं कि यीशु ने युवा अवस्था में भारत और हिमालय की यात्रा की, यहाँ के आध्यात्मिक गुरुओं से शिक्षा प्राप्त की और करुणा, प्रेम तथा अहिंसा के सिद्धांत सीखे―जिन्होंने बाद में उनकी शिक्षाओं का आधार बनाया। कर्स्टन न केवल तिब्बती पांडुलिपियों, बौद्ध मठों और इस्लामी स्रोतों का उल्लेख करते हैं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर क्षेत्र में “यीशु की समाधि” जैसी विवादास्पद किंवदंतियों पर भी प्रकाश डालते हैं। पुस्तक का सबसे साहसिक दावा यह है कि क्रूस पर चढ़ाए जाने के बाद भी यीशु जीवित बच गए और पुनः भारत लौट आए, जहाँ उनकी मृत्यु प्राकृतिक रूप से हुई।