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मुस्लिम समाज-परिवार की लघुकथाएं
2020

आज दुनिया में मुसलमानों के नाम पर जो लोग जिहाद और आतंक कीजिस कार्रवाई को खुदा का हुक्म बता रहे हैं और मरने के बाद हूरों के साथ जन्नत मेंअन्तहीन जीवन की कामनाओं को हवा दे रहे हैं, दरअसल यह पूरी कौम को गुमराह कर रहे हैं। इन हालात से मैं खुद को शर्मिन्दाअनुभव करता हूं। खुुदा पर ईमान का मतलब रब की तलाश है न कि उसके नाम पर कत्लेआम।जिसके दिल में रब का डर नहीं। वह इंसान नहीं।

ऐसे तमाम लोगों से मिलते जुलते और उनकी सोच के दायरे मेंकदम रखते हुए मेरी निगाहों ने जो कुछ देखा और कानों ने सुना और उसके जो नतीजेदेखने को मिले। मैंने हमेशा पूरी ईमानदारी से अपनी कलम का विषय बनाने औेर जमाने कोउसके गढ़े हुए सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक,धार्मिक तथा पारंपरिक संरचना के दुष्परिणामों कोनतीजे के साथ पाठकों को अवगत कराने का प्रयास किया है।


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